भारत माँ अपंगता की श्रेणी में आ चुकी है । जिसे हम किसी भी प्रकार फॉर्म भरते वक़्त Physically Handicapped कहते है । भारत माँ का एक पैर(दाहिना ) तो कबसे घायल ही है जबसे किसान आत्महत्या कर रहे है ।

दूसरा पैर पर तबसे चोट पड़ना शुरू हुई जबसे हमारे जवान शहीद होने लगे । बाए पैर (जवान ) से तो हमेशा लहू ही बहता रहता है क्योंकि रोज़ उसपर पत्थर और ईट से वार होता रहता है। बाए पैर की तो दो हड्डी तब टूट गयी बुरी तरह से जब बाहरी हमला हुआ ( पठानकोट और उरी हमला )। अबतक तो खून तो सिर्फ अपनों ने बहाया था अब बाहरी ने भी । पैरो की बात छोड़ दे अगर माँ के पल्लू में छुपे साँप (नक्सली ) ने भी कुछ काम कमाल नहीं किया है । माँ के बहिने हाथ (पैरामिलिटरी फ़ोर्स ) पर वार कर करके उसको निर्जीव बना दिया है। बाहिना हाथ तो वर्षो से निर्जीव ही है । बहिना हाथ कई बार अपना खेल दिखाता भी है लेकिन उसको भी आस्तीन के साँप का शिकार बनाना पड़ता है । शिकार बनने की वजह डॉक्टर द्वारा परामर्श ।
कहेंगे की यह डॉक्टर कौन है? डॉक्टर यहाँ सरकार है।
साँपो को मार डाला तो सपेरो का क्या होगा (नेताओ को वोट कहा से मिलेंगे )? साँप को मारने पर वन विभाग (मानवाधिकार समिति ) आ जाती है , लेकिन साँपो को वन विभाग कही दूर नहीं भेजते ताकि इंसानो को वो न काटे , ऐसा करने पर साँप उसको खुद नहीं काट लेगा!
डॉक्टर जले और कटे हुए पर संवेदना भी जताता है । मरहम (सवेंदना) के नाम पर जले पर बर्फ (शहीद का सम्मान पैरामिलिटरी को ) और कटे पर 5-5 रुपया (5 लाख का मुआवज़ा सेना में शहीद को ) bandage लगाता है । डॉक्टर ज़्यादा कुछ कर भी नहीं सकता क्योंकि डॉक्टर बनाने से पहले कसमे (देश की नियम एवं कानून व्यवस्था और विदेश नीति ) खायी थी । यह कसमे रोक देती है डॉक्टर को कुछ आगे करने से ।
क्या कसमे इतनी ज्यादा महत्वपूर्ण है जो किसी की ज़िन्दगी से ज्यादा प्यारी है ?
सिर पत्थर खा खाके फूटा हुआ है ,दोनों पैर टूट चुके है ,हाथ में फ्रैक्चर है।
क्या इतनी ज्यादा अपंगता दिखा कर डॉक्टर माँ को AIIMS अस्पताल ( UN- United Nations) में एक बिस्तर लेने को कह रहा है ?क्या डॉक्टर अपने वचन और कसमे भूल कर अपने एक अच्छे डॉक्टर होने का अस्तित्व नहीं दे सकता ? डॉक्टर क्या खुद माँ को ठीक नहीं कर सकता ? ज़रूरी है AIIMS में भर्ती मिलकर हे इलाज संभव है ।
(माँ आज भी उसी ताकत के साथ खड़ी है क्योकि नसों में रक्त(जवान और किसान का हौसला और जज़्बा ) अभी भी बहता है। )
(देश का विकास ज़रूरी है , युद्ध नहीं कर सकते क्योकि देश का नुक्सान होगा । लेकिन उस देश के विकास का क्या फायदा जब उसके नागरिक ही ज़िंदा न रहे )



